मंगलवार, 11 अगस्त 2015

बीवी

एक नया नया शादीशुदा जोड़ा एक बाग में टहल रहा था।

अचानक एक बड़ा सा कुत्ता उनकी तरफ झपटा, दोनों को ही लगा कि ये उन्हें काट लेगा।

बचने का कोई रास्ता न देख पति ने तुरंत अपनी पत्नी को गोद में ऊपर तक उठा लिया ताकि कुत्ता काटे तो उसे काटे न कि उसकी पत्नी को।

कुत्ता बिलकुल नज़दीक आकर रुका, कुछ देर तो भौंका और फिर पीछे की तरफ भाग गया।

पति ने चैन की सांस ली और इस उम्मीद में पत्नी को गोद से उतारा कि पत्नी उसे गले लगाएगी और प्यारा सा छोटा सा किस करेगी।

तभी उसकी तमाम उम्मीदों पर पानी फेरती उसकी बीवी चिल्लाई...........

मैंने आज तक लोगों को कुत्ते को भगाने के लिए पत्थर या डंडा फेंकते तो देखा था पर ऐसा आदमी पहली बार देख रही हूँ जो कुत्ते को भगाने के लिए अपनी बीवी को फ़ेंकने को तैयार था

शनिवार, 8 अगस्त 2015

इश्क

एक बाग मेँ एक फूल पर एक भँवरा और एक तितली बैठा करते थे.. कुछ समय बाद वो एक दुसरे से मोहब्बत करने लगे थे

वक्त के साथ उनकी मोहब्बत इतनी गहरी हो गयी थी कि उनमेँ से एक दुसरा नहीँ दिखता तो वो बैचेन होने लगते

एकदिन तितली ने भँवरे से कहा  कि मैँ तुमसे जितना प्यार करती हुँ तुम उतना प्यार नहीँ करते... 

इस बात को लेकर दोनोँ मेँ शर्त लग गयी कि जो ज्यादा प्यार करता है वो कल सुबह इस फूल पर पहले आकर बैठेगा.... शाम को इस शर्त के साथ दोनो घर चले गये.....
 
जबरदस्त ठंड होने के बावजूद तितली सुबह जल्दी आकर फूल पर बैठ गयी... लेकिन भँवरा अभी तक नहीँ आया था...
 
तितली बहुत खुश थी क्योँकि वो शर्त जीत चुकी थी....कुछ देर बाद धुप से फूल खिला तो तितली ने देखा कि भँवरा फूल के अँदर मरा पङा है... क्योँकि वो शाम को घर गया ही नहीँ था और ठंड से मर गया.....
 
इश्क वो जज्बा है जिसमेँ इश्क करने वाले हदेँ तोङ दिया करते
हैँ....सच्ची मोहब्बत किसी की आजमाया नहीँ करते।

बीबी से झगड़ा

बीवी से झगडे करने के फायदे..

1. नींद में कोई व्यवधान नहीं आता : सुन रहे हो क्या, लाइट बंद करो, पंखा बंद करो, चादर इधर दो, इधर मुह करो, टाइप कुछ भी बाते नहीं होत

2. पैसे की बचत : जब बीवी से झगड़ा हुआ रहता है इस दौरान बीवी पैसे नहीं मांगती,

3. तनाव से मुक्ति : झगड़े के दैरान बातचीत बंद होती है जिससे किचकिच कम होती है और पति तनाव से मुक्त रहता है,

4. आत्मनिर्भरता आती है : जो अपना काम आप कर सकते हैं वो इसलिए नहीं करते कि बीवी कर देती है, झगड़े के बाद वो छोटे मोटे काम (खुद ले कर पानी पीना, नहाने के बाद अपने कपडे खुद निकालना, अपने लिए खुद चाय बनाना) खुद कर के आदमी आत्मनिर्भर हो जाता है,

5. काम में व्यवधान नहीं होता : झगडे के दौरान काम के समय आपको बीवी के फ़ालतू कॉल (जानू क्या कर रहे हो, मन नहीं लग रहा है, आज बहुत गर्मी है, इस प्रकार के) नहीं आते, जिससे आप अपने काम में ध्यान केंद्रित कर सकते है

6. घर जल्दी जाने की चिंता से मुक्ति : ( अधिकांश पतियो को काम के बाद जल्दी घर आने के लिए घर से बारम्बार फ़ोन आते है मगर एक बार झगड़ा हो जाने के बाद आप कुछ दिन तक इस चिंता से दूर रह सकते है,

7. आप का भाव बढ़ता है : ये इंसान का मनोविज्ञान है कि जो चीज नहीं होती उसके मूल्य का अहसास तभी होता है, झगडे के दौरान बीवी को आपके भाव का अहसास होता है

8. प्यार बढ़ता है : आपस में झगडे से प्यार बढ़ता है, क्योकि अक्सर देखा गया है एक बार बारिश हो जाए तो मौसम सुहाना हो जाता है..

और भी फायदे हैं.

मगर समयाभाव के कारण लिखना मुश्किल है.

तो आइये प्रण लें कि आज के बाद हम सभी पति महीने में एक न एक बार अपनी बीवी से झगड़ा जरूर करेंगे (बीवी तो हमेशा तैयार रहती है) ताकि महीने में कुछ दिन पति लोग भी कुछ शांति से गुजार सकें

सोमवार, 3 अगस्त 2015

किचन

रामू जिस घर में काम करता था, उस घर के मालिक की व्हिस्की की बोतल से एक-दो पैग चुराकर पी लेना और फिर उतना ही पानी बोतल में मिला देना, उसकी आदत थी।
 

मालिक को उस पर शक था लेकिन फिर भी उसने कुछ नहीं कहा।
 

लेकिन जब ये रोज की ही बात हो गई तो एक दिन जब मालिक अपनी पत्नी के साथ ड्राइंग रूम में बैठा था, उसने वहीं से अपने नौकर रामू को जोर से आवाज लगाई जो किचन में खाना बना रहा था।

मालिक (चिल्लाकर)---" रामू...."
रामू (किचन से)---"हाँ....मालिक ? "
 

 मालिक---" मेरी बोतल से किसने व्हिस्की निकाल कर पी और फिर पानी मिला दिया है ? "
किचन से कोई जवाब नहीं मिला।
 

मालिक ने फिर अपना प्रश्न दोहराया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
 

मालिक बेहद गुस्से में किचन में पहुँचा और रामू पर चिल्लाया---" ये क्या हो रहा है ? मैंने जब तेरा नाम लिया तो तूने जवाब दिया लेकिन जब मैंने फिर कुछ पूछा, फिर दोबारा पूछा तो तू जवाब नहीं दे रहा।क्यों ?? "
 

रामू---" वो ऐंसा है मालिक, कि, इस किचन में आपको आपका सिर्फ नाम ही सुनाई देता है, और कुछ नहीं। "
 

मालिक---" ये कैसे संभव है ? ठीक है, मैं तुझे गलत साबित करता हूँ।
तू जा और ड्राइंग रूम में मालकिन के पास जाकर मुझे आवाज लगा और फिर कुछ और भी पूछ। मैं यहाँ किचन में सुनता हूँ। "
 

रामू ड्राइंग रूम में मालकिन के पास गया और वहाँ से मालिक को पुकारा---"मालिक....."
मालिक ( किचन से )---"हाँ..... रामू ? "
 

रामू---" अपने घर की नौकरानी को मोबाइल किसने दिलाया ? "
किचन से कोई जवाब नहीं मिला।
 

रामू ने अगला प्रश्न किया,
रामू---" और फिर नौकरानी के साथ लांग ड्राइव पर कौन गया था ? "
कोई जवाब नहीं।
 

मालिक किचन से ड्राइंग रूम में आया और बोला ---" तू सही बोल रहा है रामू। अगर कोई किचन में हो तो उसे पुकारा गया अपना नाम ही बस सुनाई देता है और कुछ नहीं।

शनिवार, 1 अगस्त 2015

न्यूज़

एक टी.वी. पत्रकार एक किसान का इंटरव्यू ले रहा था...
 

पत्रकार : आप बकरे को क्या खिलाते हैं...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..

किसान : घाँस..
पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी घाँस..
 

पत्रकार : आप इन बकरों को बांधते कहाँ हो...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : सफ़ेद को..
किसान : बाहर के कमरे में..
पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी बाहर के कमरे में...
 

पत्रकार : और इन्हें नहलाते कैसे हो...??
किसान : किसे काले को या सफ़ेद को...??
पत्रकार : काले को..
किसान : जी पानी से..
पत्रकार : और सफ़ेद को...??
किसान : जी उसे भी पानी से..
 

पत्रकार का गुस्सा सातवें आसमान पर, बोला : कमीने ! जब दोनों के साथ सब कुछ एक जैसा करता है, तो मुझे बार-बार क्यों पूछता है.. काला या सफ़ेद...????
 

किसान : क्योंकि काला बकरा मेरा है...
पत्रकार : और सफ़ेद बकरा...??
किसान : वो भी मेरा है...
 

पत्रकार बेहोश...
 

होश आने पे किसान बोला अब पता चला कमीने जब तुम एक ही news को सारा दिन घुमा फिरा के दिखाते हो हम भी ऐसे ही दुखी होते है !!!

रविवार, 26 जुलाई 2015

संकोच

संकोच

आस्ट्रेलिया में रहकर पढने वाले सऊदी अरब के स्टूडेंट ने अपने अब्बा जान को मेल किया:-

आस्ट्रेलिया बहुत ही सुन्दर देश है, और उतने ही सुन्दर यहाँ के लोग।
लेकिन मुझे उस समय संकोच लगता है, जब मैं 20 तोले की सोने की चेन गले में डालकर अपनी फरारी से कॉलेज जाता हूँ, जबकि बाकी सभी लोग ट्रेन से कॉलेज जाते हैं।

आपका साबिर
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दूसरे दिन उसे अब्बा का मेल मिला

बेटे, अब तुम्हें भी झिझक या शर्म नही होगी, क्योंकि मैंने तुम्हारे खाते में 20 मिलियन डॉलर डाल दिये हैं, वहाँ तुम भी ट्रेन ले लो।
तुम्हारा
अल हबीबी

बुधवार, 22 जुलाई 2015

अन्न

बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा। सेठ को हुआ कि इतना पाप हो रहा है तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
 

एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा को आमंत्रित कर भोजन प्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।
 

साधु बाबा ने बासमती चावल की खीर खायी। दोपहर का समय था। सेठ ने कहाः "महाराज ! अभी आराम कीजिए। थोड़ी धूप कम हो जाय फिर पधारियेगा।"
 

साधु बाबा ने बात स्वीकार कर ली। सेठ ने 100-100 रूपये वाली 10 लाख जितनी रकम की गड्डियाँ उसी कमरे में चादर से ढँककर रख दी।
 

साधु बाबा आराम करने लगे। खीर थोड़ी हजम हुई। चोरी के चावल थे। 

साधु बाबा के मन में हुआ कि इतनी सारी गड्डियाँ पड़ी हैं, एक-दो उठाकर झोले में रख लूँ तो किसको पता चलेगा ? साधु बाबा ने एक गड्डी उठाकर रख ली। शाम हुई तो सेठ को आशीर्वाद देकर चल पड़े।
 

सेठ दूसरे दिन रूपये गिनने बैठा तो 1 गड्डी (दस हजार रुपये) कम निकली। सेठ ने सोचा कि महात्मा तो भगवत्पुरुष थे, वे क्यों लेंगे ? नौकरों की धुलाई-पिटाई चालू हो गयी। ऐसा करते-करते दोपहर हो गयी।
 

इतने में साधु बाबा आ पहुँचे तथा अपने झोले में से गड्डी निकाल कर सेठ को देते हुए बोलेः
"नौकरों को मत पीटना, गड्डी मैं ले गया था।"
 

सेठ ने कहाः "महाराज ! आप क्यों लेंगे ? जब यहाँ नौकरों से पूछताछ शुरु हुई तब कोई भय के मारे आपको दे गया होगा और आप नौकर को बचाने के उद्देश्य से ही वापस करने आये हैं क्योंकि साधु तो दयालु होते हैं।"
 

साधुः "यह दयालुता नहीं है। मैं सचमुच में तुम्हारी गड्डी चुराकर ले गया था। सेठ ! तुम सच बताओ कि तुम कल खीर किसकी और किसलिए बनायी थी ?"
 

सेठ ने सारी बात बता दी कि स्टेशन मास्टर से चोरी के चावल खरीदता हूँ, उसी चावल की खीर थी।
 

साधु बाबाः "चोरी के चावल की खीर थी इसलिए उसने मेरे मन में भी चोरी का भाव उत्पन्न कर दिया। सुबह जब पेट खाली हुआ, तेरी खीर का सफाया हो गया तब मेरी बुद्धि शुद्ध हुई कि 'हे राम.... यह क्या हो गया ? मेरे कारण बेचारे नौकरों पर न जाने क्या बीत रही होगी। इसलिए तेरे पैसे लौटाने आ गया।"
 

इसीलिए कहते हैं किः
जैसा खाओ अन्न वैसा होवे मन। जैसा पीओ पानी वैसी होवे वाणी।।