इधर उधर से
रविवार, 19 अक्टूबर 2014
बेवफा
वो शर्मिन्दा भी नही अपनी बेवफाई पे
मैं जिंदा हूँ इस लिए, कि बेवफा न था..
सोमवार, 15 सितंबर 2014
ये तोता नहीं
गुरुवार, 11 सितंबर 2014
ज़िन्दगी
मुसलसल हादसों से
कुछ यूँ गुज़री है ज़िन्दगी
कभी आराम से बैठे तो
लगता है कि मर गए हैं
मंगलवार, 9 सितंबर 2014
चश्मा
जब न था चश्मा मयस्सर तब निगाहें उठती नहीं थीं ।
अब वे आए हैं चश्मा चढ़ा कर निगाह चार करने
।
।
बुधवार, 3 सितंबर 2014
अचानक
चलते चलते अचानक पीछे मुङकर देखा...
तो कुछ यादें हँस रहीं थी, और कुछ रिश्ते दम तोड़ रहे थे।
रविवार, 31 अगस्त 2014
मोहलत
तुमने तो कह दिया कि मोहब्बत नहीं मिली.
मुझको तो ये कहने की भी मोहलत नहीं मिली.........
शनिवार, 9 अगस्त 2014
दिया बत्ती
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